Madrasa Registration मदरसों का रजिस्ट्रेशन नहीं तो होंगे सील !

Madrasa Registration उत्तराखंड के हरिद्वार में एक सप्ताह के भीतर मदरसों के रजिस्ट्रेशन का आदेश दिया गया है। उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने बिना रजिस्ट्रेशन के चलने वाले मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने बहादराबाद ब्लॉक के मदरसों एवं अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों का निरीक्षण कर मान्यता और संचालन व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने बिना प्राधिकरण मान्यता के धार्मिक शिक्षा संचालित करने वाले संस्थानों को एक सप्ताह के भीतर आवश्यक मान्यता लेने के निर्देश दिए। ऐसा न करने वाले मदरसों को सील करने की चेतावनी दे दी।

Madrasa Registration

 

क्या है मामला? उत्तराखंड में मदरसों पर एक बार फिर कार्रवाई का खतरा मंडराने लगा है। हरिद्वार के तीन मदरसों को प्राधिकरण की ओर से एक सप्ताह में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी कराने की मोहलत दी गई है। समय सीमा के भीतर कागजी कार्रवाई पूरी न होने की स्थिति में मदरसों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं। दरअसल, मदरसों का औचक निरीक्षण किया गया। इसमें कई प्रकार की गड़बड़ी की बात सामने आई। बिना प्राधिकरण की अनुमति के मदरसों के निर्माण की बात सामने आई है।

निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने दावा किया कि बिना अनुमति भवन का निर्माण किया गया। बिना मदरसा चलाने की अनुमति लिए बिना तालीत दी जानी शुरू कर दी गई। अधिकारियों का दावा है कि इन मदरसों ने धार्मिक शिक्षा देने के लिए आवश्यक मंजूरी नहीं ली। निरीक्षण के क्रम में टीम मदरसा इस्लामिया तालीमुल कुरान, भारापुर भोरी और फलाहे दारैन मॉडर्न स्कूल, भोरी रुड़की का निरीक्षण किया। इसमें पाया कि वहां शिक्षा विभाग की मान्यता तो मिली है, लेकिन अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की मान्यता नहीं ली गई।

रजिस्ट्रेशन के दिए गए निर्देश Madrasa Registration 

प्राधिकरण की ओर से दोनों संस्थानों को वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने बंद हो चुके संस्थानों के विद्यार्थियों को अन्य मान्यता प्राप्त विद्यालयों एवं मदरसों में स्थानांतरित किए जाने की जानकारी ली, ताकि किसी भी बच्चे की शिक्षा बाधित न हो। उन्होंने कहा कि बिना रजिस्ट्रेशन किसी भी मदरसे को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा नहीं देगा। साथ ही, प्राधिकरण ने साफ किया कि शिक्षा विभाग की मान्यता लेकर चलने वाले मदरसे केवल धार्मिक शिक्षा नहीं दे सकते। इनका शिक्षा की मुख्य धारा पर फोकस होना चाहिए, ताकि छात्र-छात्राओं को अच्छी शिक्षा मिल सके। उनका भविष्य उज्जवल हो सके।

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