बड़े होने पर दोस्त बनाना मुश्किल क्यों है ?

जब हम बच्चे होते हैं तो दोस्त बनाना बहुत आसान रहता है. किसी से कोई बैर नहीं होता सब अच्छे लगते हैं. स्कूल में साथ बैठना, ट्यूशन जाना या फिर खेलना-कूदना सब एक साथ करते हैं, लेकिन जब हम बड़े हो जाते हैं तो किसी के साथ ज्यादा बातें करना या फिर दोस्ती करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. बड़े होने के बाद नौकरी, परिवार और दूसरी जिम्मेदारियों के बीच नए लोगों से मिलने या पुराने दोस्तों से बात करने का समय निकालना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में कई बार अकेलापन महसूस हो सकता है, खासकर तब जब आपको सिर्फ किसी ऐसे इंसान की जरूरत हो जिससे आप खुलकर बात कर सकें.

मेंटल हेल्थ एजुकेटर और सर्टिफाइड एनएलपी कोच देविना कौर के अनुसार, स्कूल और कॉलेज से नौकरी वाली जिंदगी में आने के बाद दोस्त बनाने का तरीका बदल जाता है. पहले क्लास, ट्यूशन और खेलकूद जैसी एक्टिविटी के चलते लोगों के साथ समय ज्यादा बिता सकते है. इससे दोस्ती अपने आप बन जाती थी, लेकिन नौकरी शुरू होने के बाद नई दोस्ती बनाने के लिए अक्सर खुद पहल करनी पड़ती है.

लोगों से मिलने-जुलने का समय
जब हम बड़े हो जाते हैं, तो नौकरी, परिवार की जिम्मेदारियां और दूसरे काम अधिक बढ़ जाते हैं, जिसके चलते नए लोगों से मिलने या रिश्ते बनाने के लिए समय और एनर्जी कम हो जाती है, लेकिन स्कूल और कॉलेज में दोस्तों से मिलना अपने आप हो जाता था, लेकिन बड़े होने के बाद लोगों से जुड़ने के मौके खुद बनाने पड़ते हैं.

रिजेक्शन का डर
उम्र बढ़ने के साथ लोग नए रिश्ते बनाने को लेकर ज्यादा सतर्क हो जाते हैं. अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि अगर सामने वाला बात नहीं करना चाहता हो, क्या मैं जरूरत से ज्यादा उत्साहित तो नहीं लगूंगा. यही झिझक कई बार दोस्ती की शुरुआत को रोक देती है, क्योंकि हर कोई दूसरे के पहल करने का इंतजार करता रहता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *